किताब से बड़ा कोई दोस्त नहीं होता, नववर्ष में लोग पुस्तकों को बनाएं अपना श्रेष्ठ साथी:- डॉ. चंद्रिका
रिपोर्ट:- अमित कुमार
चले तो पांव के नीचे कुचल गई कोई शय,
नशे की चौक में देखा नहीं की दुनियां है………
उपरोक्त चंद लाइनें शायर “सहाब जाफरी” की लिखी मानवजाति में फैले शराब और उसकी गहरी और बुरे परिणाम को जाहिर करता है। वैसे ही कोडरमा जिले के सतगावां में रह रहे डॉ. सह लेखक चंद्रिका प्रसाद के समाज से शराब छुड़वाने के प्रयास को साझा करते ETV HINDUSTAN से अमित कुमार की विशेष रिपोर्ट।
कोडरमा:- शराब की लत से हो रहे सामाजिक और पारिवारिक नुकसान को लेकर सतगांवा निवासी डॉ. चंद्रिका प्रसाद ने अपनी कविता “पियकड़” के माध्यम से समाज को जागरूक करने का अनूठा प्रयास किया है। उनकी कविता, जो शराब के दुष्प्रभावों पर केंद्रित है, न केवल विचारशील है बल्कि गहरे प्रभाव डालने वाली भी है।
डॉ. चंद्रिका प्रसाद ने कहा कि नए साल में हमें किताबों को अपना सबसे अच्छा दोस्त बनाना चाहिए क्योंकि किताब से बड़ा कोई साथी नहीं होता। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे ज्ञान और शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाएं और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।
डॉ. चंद्रिका प्रसाद ने सराहना करते हुए बताया कि हरिद्वार से आई चार बालिकाओं ने कोडरमा जिले के विभिन्न प्रखंडों में जाकर बच्चों को नशा छोड़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने मोबाइल, लैपटॉप या अन्य किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने की अपील की। इस प्रयास को जीवन में आत्मसात करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि युवा पीढ़ी स्वस्थ और सशक्त समाज का निर्माण कर सके।
शराब के दुष्प्रभावों पर कविता के माध्यम से चेतावनी
अपनी कविता “पियकड़” में उन्होंने शराब को एक ऐसा नाग बताया है, जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देता है। कविता में लिखा गया:
” मत पी तू शराब रे बबूआ ,
एक दिन बहुत पछताओगे।
बुढापा देख नहीं पाओगे,
जवानी में ही मर जाओगे।।”
डॉ. चंद्रिका प्रसाद ने कहा कि शराब न केवल स्वास्थ्य को बल्कि पारिवारिक और सामाजिक ताने-बाने को भी नष्ट कर देती है। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि किस तरह शराब पीने वाला व्यक्ति खुद को और अपने परिवार को अंधकार में धकेल देता है।डॉ. प्रसाद की दिनचर्या में रामायण और गीता का पाठ शामिल है। उन्होंने बताया कि इन धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन और मंथन के बाद वे कविता की रचना करते हैं।
उनका मानना है कि आध्यात्मिकता और शिक्षा ही समाज को सही दिशा दिखा सकती है।उन्होंने वर्तमान समय में सावधान रहने की अपील की और कहा कि “एड” (महामारी) का दौर चल रहा है। हर व्यक्ति को सतर्क रहना चाहिए और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना चाहिए।






